इस ब्लॉग से मेरी अनुमति के बिना

कोई भी रचना कहीं पर भी प्रकाशित न करें।

कामनाएँ



साल दर साल रैन बसेरा 
का  साथ मत दो 
बस एक ख्याल ही अपना आने दो
गगन के विस्तार सा आयाम मत दो 
बस एक कोने में सिमटा सूर्य बन रहने दो
सावन की हरियाली सा संजीवनी अहसास मत दो 
बस एक अमलतास बन मुस्काने दो
सर्द रातों में बाहों के घेरे का जकड़न मत दो 
बस टिकने के लिए कंधे का सहारा दे दो
आँखों में बंद ख्वाबों का आसरा मत दो 
बस अपनी एक बेचैन पल का हवाला दे दो
दूब की मखमली चादर पर साथ चलने दो
बस ओस की एक बूँद बन गिर जाने दो
अपनी दूरियों के उन घंटों का हिसाब मत दो 
बस मुझे तन्हाई में जीने के कुछ मंत्र दे दो 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’  – (25 March 2012 at 09:07)  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 26-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’  – (25 March 2012 at 09:08)  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 26-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

expression  – (25 March 2012 at 09:23)  

बहुत सुन्दर.....

अपनी दूरियों के उन घंटों का हिसाब मत दो
बस मुझे तन्हाई में जीने के कुछ मंत्र दे दो

वाह!!!

Anupama Tripathi  – (25 March 2012 at 18:01)  

अपनी दूरियों के उन घंटों का हिसाब मत दो
बस मुझे तन्हाई में जीने के कुछ मंत्र दे दो

धीरता का सुंदर पथ ...
ठहरी सी ....सुंदर अभिव्यक्ति ...

udaya veer singh  – (25 March 2012 at 19:01)  

बेहतरीन रचना ,मुखर अभिव्यक्ति प्रशंशनीय है / शुभकामनायें जी /

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib')  – (25 March 2012 at 20:15)  

सुंदर प्रस्तुति....

veerubhai  – (25 March 2012 at 22:01)  

दूब की मखमली चादर पर साथ न चलने दो
बस ओस की एक बूँद बन गिर जाने दो ।
अपनी दूरियों के उन घंटों का हिसाब मत दो
बस मुझे तन्हाई में जीने के कुछ मंत्र दे दो
समझौता -ए - ज़िन्दगी ,संतोषानंद होती ज़िन्दगी को सलाम .जीने के लिए बस एक ठिकाना ,एक छत,थोड़ा सा यकीन चाहिए .

सदा  – (25 March 2012 at 22:56)  

अपनी दूरियों के उन घंटों का हिसाब मत दो
बस मुझे तन्हाई में जीने के कुछ मंत्र दे दो
बहुत खूब ।

Reena Pant  – (26 March 2012 at 04:21)  

सुंदर रचना

Arshad Ali  – (26 March 2012 at 08:44)  

bahtareen rachna...bhawpurn..aabhar

Post a Comment

LinkWithin