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फिर लौट रहा मधुमास

फिर लौट   रहा   मधुमास 


फिर लौट   रहा   मधुमास 
हरे रंग का ओढ़े लिबास
 ख़ुश्क  रंगत निखर गयी 
दुल्हन सी प्रकृति सज गयी ।

पवन रथ में हो सवार 
परिणय मिलन को बेकरार 
तूफ़ां लिए पयोद मचल रहा 
आग इधर भी धधक रहा ।

कलियों में जो मुस्कान भरता 
उर में वो उल्लास रचता 
माटी में सौंधी महक
कानन में कौंधी चहक।

सुर के पाखी लुभाते 
डाली - डाली पींगें लगाते 
नीड़ों में कहाँ चैन - बसेरा
उनींदी आँखों में होता सबेरा ।

छा  गया समंदर गगन में 
विटप मुस्काया  उपवन में 
कोई संदेशा भेजा ना तार 
पाहुन का फिर भी  है इंतज़ार । 

मन पखेरू उड़ चला 
प्रकृति संग झूम चला 
कण - कण को है आभास 
फिर लौट रहा मधुमास ।   

shashi purwar  – (25 June 2013 at 06:12)  

बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (26-06-2013) के धरा की तड़प ..... कितना सहूँ मै .....! खुदा जाने ....!१२८८ ....! चर्चा मंच अंक-1288 पर भी होगी!
सादर...!
शशि पुरवार

रविकर  – (25 June 2013 at 21:18)  

सुन्दर प्रस्तुति-
बधाई-

Kailash Sharma  – (26 June 2013 at 01:13)  

बहुत सुन्दर शब्द चित्र...

डॉ.राज सक्सेना (राजकिशोर सक्सेना राज)  – (26 June 2013 at 04:27)  

तूफ़ां लिए पयोद मचल रहा
आग इधर भी धधक रहा । क्या बात है | बिलकुल नया प्रयोग |

कविता रावत  – (26 June 2013 at 05:48)  

मन पखेरू उड़ चला
प्रकृति संग झूम चला
कण - कण को है आभास
फिर लौट रहा मधुमास ।
.. ..बहुत सुन्दर मधुर रचना

कालीपद प्रसाद  – (26 June 2013 at 06:29)  

छ गया समंदर गगन में
विटप मुस्काया उपवन में
कोई संदेशा भेजा ना तार
पाहुन का फिर भी है इंतज़ार ।

मन पखेरू उड़ चला
प्रकृति संग झूम चला
कण - कण को है आभास
फिर लौट रहा मधुमास ।

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !
latest post जिज्ञासा ! जिज्ञासा !! जिज्ञासा !!!

रचना दीक्षित  – (26 June 2013 at 10:11)  

कण - कण को है आभास
फिर लौट रहा मधुमास ।

सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति.

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