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धुरी

अब  कोई तुम्हे  अबला कहे
तो बतला देना कि कैसे
उस दिन ज्वर में तपते हुए
तुम्हारी आँख क्या लग गई कि
गृहस्थी की गाड़ी रुक गयी
अस्त - व्यस्त हो गया माहौल
पता नहीं तुम्हे अबला समझने वाले
कद्देवार मर्द यह
 समझ भी पाये या नहीं कि
तुम परिवार की धुरी हो।
तुम्हारी पसंद - नापसंद को दरकिनार कर
कोई कौड़ियों की मोल तुम्हे बेच दे
तो प्रतिकार करना
कुलटा कहने वाले लोग
चंद दिनों में तुम्हारी अहमियत
समझ जायेंगे।
और हाँ ,पैसों की थैली फेंक कर
एक रात की दुल्हन तुम्हे बनाने वाले
वेश्या कहते थे न ,
अब उनकी पैसों की थैली
उनपर ही फेंककर जतला देना कि
उन्होंने अपनी आत्मा गिरवी रखी है
तुमने नहीं ,तुम तो प्राणवायु हो
जिसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं। 

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