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"कुछ रातें कटती नहीं"

तृष्णाओं की यात्रा अनंत होती हैं ,
चाहे मन में लगाम लगा लो
कुछ इरादे दबते नहीं ।

आशाओं की पारदर्शिता छलावा होती हैं ,
चाहे लाख जतन कर लो
कुछ फासले थमते नहीं ।



विचारों की दुनिया विस्तृत होती है ,
चाहे शब्दों के रंग जितनी चढ़वा लो 
कुछ कैनवास भरते नहीं ।

सन्नाटों की प्रतिध्वनियाँ बुलंद होती हैं ,
चाहे कितनी भी दीवारें चुनवा लो
कुछ यादें बिसरती नहीं ।

बाट जोहते सुबह -शाम होती हैं ,
चाहे आँखों में साल बसा लो
कुछ रातें कटती नहीं ।



amresh mishra  – (16 May 2012 at 01:59)  

ye kavita chupke se bebasi ko bata gae kuch rate katati nhi wakae aap ke kalam me jadu hai kavita ji

amresh mishra  – (4 August 2012 at 14:34)  

fir mai hi likh rha hu...kuch rate shi me nhi kate nhi katti hai...

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