"कुछ रातें कटती नहीं"
>> Thursday, 1 December 2011 –
कुछ रातें कटती नहीं
तृष्णाओं की यात्रा अनंत होती हैं ,
चाहे मन में लगाम लगा लो
कुछ इरादे दबते नहीं ।
आशाओं की पारदर्शिता छलावा होती हैं ,
चाहे लाख जतन कर लो
कुछ फासले थमते नहीं ।
विचारों की दुनिया विस्तृत होती है ,
चाहे शब्दों के रंग जितनी चढ़वा लो
कुछ कैनवास भरते नहीं ।
विचारों की दुनिया विस्तृत होती है ,
चाहे शब्दों के रंग जितनी चढ़वा लो
कुछ कैनवास भरते नहीं ।
सन्नाटों की प्रतिध्वनियाँ बुलंद होती हैं ,
चाहे कितनी भी दीवारें चुनवा लो
कुछ यादें बिसरती नहीं ।
बाट जोहते सुबह -शाम होती हैं ,
चाहे आँखों में साल बसा लो
कुछ रातें कटती नहीं ।
ye kavita chupke se bebasi ko bata gae kuch rate katati nhi wakae aap ke kalam me jadu hai kavita ji
fir mai hi likh rha hu...kuch rate shi me nhi kate nhi katti hai...