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रविकर फैजाबादी  – (1 August 2012 at 23:44)  

लगता है भाई को राखी बाँध
कर जल्दी ही आ गईं |
सादर ||

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  – (2 August 2012 at 05:33)  

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
श्रावणीपर्व और रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएं!

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