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 तुम  एक जुनून हो 

 कुछ खुशगवार लम्हों की महक 
साँसों में समां सीने तक उतर गयी है 
महफूज़ है  वह अहसास जिसकी  लहक 
सुलगा कर बदन तर - बतर कर गयी है ।

शब्दों में बहुत ढाला प्यार को 
फिर भी कविता नहीं बन पाई है 
लगता है उस अधूरेपन की कसक को 
खुदा ने भी खूब आजमाई है ।

आसमां की अरुणाई का नील रंग 
मेरे अश्क को तुममे संजोया है 
विलग कैसे हो सकता भला एक अंग 
जब दो रूहों ने साथ साथ साँसें बटोरा है ।

वो जिज्ञासा ,पिपासा और तन्हाई की रात 
बेतरतीब हैं आलम ,तुम एक जुनून हो 
सलवटें बता रहीं हैं करवटों की बात 
मेरी नज्मों की तुम मज़मून हो  ।

संगीता स्वरुप ( गीत )  – (20 August 2012 at 10:54)  

सलवटें बता रहीं हैं करवटों की बात
मेरी नज्मों की तुम मज़मून हो ।

वाह बहुत खूब ॥

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